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तो इस वजह से विकास दुबे को नहीं लगाई गई थी हथकड़ी

विकास दुबे के ए’नकाउंट’र के बाद यूपी पुलिस और STF पर तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं. इस ए’नकाउंट’र को फेक बताया जा रहा है. कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला तो मानवाधिकार आयोग तक पहुँच गए. इतने सारे सवालों के बीच सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि इतने दु’र्दांत अ’पराधी को STF की टीम बिना हथकड़ी के क्यों ला रही थी? इस सवाल को लेकर STF निशाने पर है. अगर इस ए’नकाउंट’र को लेकर भविष्य में जांच हुई तो STF को इस सवाल का जवाब देना ही होगा. लेकिन हम आपको बताते हैं अ’पराधि’यों को हथकड़ी लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट क्या कहता है.

दरअसल कई बार सुप्रीम कोर्ट ने अ’पराधि’यों को हथकड़ी लगाने को उनके मौलिक अधिकारों से जोड़ा है और इसे ‘अमानवीय, अतार्किक, बेहद कठोर और मनमाना’ करार दिया. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार अपराधियों के किसी अंग को बांधना अमानवीय और प्र’ताड़ित करने वाला है.

साल 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, ‘आरोपी को आवाजाही की न्यूनतम आजादी का अधिकार है और इसे हथकड़ी लगाकर या अन्य किसी तरीके से नहीं छीना जा सकता है. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि को न्यायिक सहमति के बिना कै’दियों को हथकड़ी लगाना अवैध है. इसके अलावा साल 1980 में भी कोर्ट ने हथकड़ी लगाने के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बात कही थी. 1980 में प्रेम शंकर बनाम दिल्ली प्रशासन केस में कोर्ट ने कहा था कि हथकड़ी लगाना अमानवीय, अतार्किक, बेहद कठोर और पहली नजर में मनमानापूर्ण है. ये संविधान के आर्टिकल 21 के खिलाफ है. ऐसे में अब अगर विकास दुबे को हथकड़ी नहीं लगाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो सुप्रीम कोर्ट की ये बात यूपी पुलिस अपने पक्ष में इस्तेमाल कर सकती है.

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