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पुतिन की बड़ी मुश्किल, लॉक डाउन की वज़ह से टल गया ये बिल

कोरो’ना वायरस ने पूरे विश्व की कमर तोड़ के रख दी हैं. कोरो’ना ने आज देश के बड़े बड़े देशो को बर्बाद कर दिया है. आज अमेरिका जैसा देश जो दुनिया का सबसे ताकतवर देश में एक है. रूस भी इस फेहरिस्त में पीछे नहीं है. रूस के राष्ट्रपति ब्लामिदिर पुतिन के लिए कोरोना वायरस उनके राजनीतिक जीवन में एक ग्रहण सा लगता दिख रहा है.

बात करें रूस की तो वहां पर संवैधानिक संशोधनों को आखिरी रूप देने के लिए 22 अप्रैल को होने वाला जनमत संग्रह टल गया है. उसका सबसे बड़ा कारण ये कोरोना वायरस है. दरअसल कोरो’ना वायरस संक्रमण के कारण पैदा हुए हालातों को देखते हुए इसे टाल दिया गया है. इसके कारण रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के राजनीतिक एजेंडे को बड़ा झटका लगा है.

बता दें कि ये संवैधानिक संशोधन व्लादिमीर पुतिन को आगे आने वाले सन 2036 तक सत्ता में रहने की अनुमति देता लेकिन अब ये संग्रह हो पाना मुश्किल है. कोरो’ना वायरस के ख’तरे को देखते हुए जनमत-संग्रह को स्थगित किया गया है. रूस ने भी कई देशों की तरह कोरोना वायरस को हलके में लिया था. लेकिन अब कोविड-19 संक्रमण पुतिन के लिए अप्रत्याशित चुनौती बन गया है. ऐसे में पुतिन की राजनीतिक लोकप्रियता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इस संक्रमण को काबू कर पाते हैं या नहीं.

आपको बता दें कि पुतिन को साल 2024 के बाद भी दो और कार्यकाल के लिए पद पर बने रहने की अनुमति देने वाले संशोधन को संसद से पहले ही अनुमति मिल चुकी है, लेकिन इस पर सरकार जनमत संग्रह कराना चाहती है. जो की अभी हो पाना मुश्किल दिख रहा हैं. चाथम हाउस के रूसी और यूरेशिया कार्यक्रम के वरिष्ठ अनुसंधानकर्ता निकोलई पेत्रोव ने बताया है कि संक्रमण के चलते मध्य जनवरी से चल रहा पूरा राजनीतिक एजेंडा खत्म हो गया है. उन्होंने कहा, ‘‘इस समय मुझे लगता है कि हम संवैधानिक संशोधन को भूल सकते हैं.’’

रूस को अभी अपने देश में कोरोना से लड़ने के लिए तैयारी अक्रनी चाहिए क्योकि रूस में भी कोरोना के काफी ज्यादा तादात में मरीज मिले हैं. रूस में कोरो’ना वायरस महामारी से 18,000 से अधिक लोग संक्रमित हैं.

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