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दलाई लामा के जन्मदिन पर आज और बुलंद हुई तिब्बत की आज़ादी की मांग, टेंशन में चीन

भारत के साथ बेवजह तनाव पैदा करके चीन दुनिया भर में अलग थलग पड़ गया है. भारत ने जिस तरह से पलटवार किया और चीन को आर्थिक रूप से चोट पहुँचाने के लिए कदम उठाये, वो चीन के लिए चौंकाने वाला था. चीन ने सोचा नहीं था कि भारत इस तरह के कदम भी उठा सकता है. दुनिया के सभी ताकतवर देश भारत के साथ खड़े हो गए. अब चीन के लिए सोमवार का दिन भारी है. चीन को टेंशन होने लगी है. क्योंकि सोमवार को तिब्बत के धार्मिक गुरु दलाई लामा का 85वां जन्मदिन है. हर साल आज के दिन दुनिया भर में फैले तिब्बत के लोग तरह तरह के कार्यक्रम आयोजित करते हैं और तिब्बत की आज़ादी की मांग करते हैं.

हर साल की तरह इस साल भी दलाई लामा के जन्मदिवस के उपलक्ष में भारत समेत दुनिया भर में कार्यक्रम होंगे और एक बार फिर तिब्बत की आज़ादी की मांग उठेगी और दुनिया का ध्यान तिब्बत की ओर जायेगा. तिब्बत कई दशकों से चीन से आज्जाद होने और अपनी स्वतंत्र पहचान के लिए बेचैन है और संघर्ष कर रहा है. तिब्बत पर कब्ज़ा करके चीन ने उसकी सांस्कृतिक पहचान मिटा दी. बौद्ध मठों को नष्ट कर दिया और कई धर्मगुरुओं और बौद्ध उपदेशकों को मौ’त के घा’ट उ’तार दिया. साल 1959 में दलाई लामा भारत आ गए और यहाँ शरण ले ली. उस वक्त वो 23 साल के थे. तब से आज तक वो तिब्बत को आज़ाद देखने की हसरत में जी रहे हैं.

दलाई लामा की पहचान दुनिया में एक शांतिदूत और मानवता का संदेश देने वाले धर्म गुरु के रूप में है. लेकिन चीन उन्हें पसंद नहीं करता. चीन नहीं चाहता कि भारत दलाई लामा को तवज्जो दे क्योंकि वो तिब्बत की आज़ादी की मांग करते हैं. दलाई लामा को चीन वन चाइना पॉलिसी के लिए खतरा मानता है. लेकिन बदले माहौल में भारत के लोग और भारत में रहने वाले तिब्बती मूल के लोग एक बार फिर से तिब्बत की आज़ादी की मांग करने लगे हैं. ट्विटर पर आज #Free Tibet और दलाई लामा ट्रेंड कर रहे हैं, जो चीन को तो निश्चित रूप से पसंद नहीं आयेगा. लेकिन आज हालात बदल चुके हैं. चीन ने हर देश के साथ दुश्मनी मोल ले ली है और आज वही सब हो रहा है जो चीन को पसंद नहीं.

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