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अयोध्या में राम मंदिर के 200 फुट नीचे डाला जाएगा टाइम कैप्सूल, जानिये क्या होता है टाइम कैप्सूल

5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन है. राम मंदिर की नींव में 200 फीट नीचे जिस टाइम कैप्सूल को डालने का फैसला किया है. जब से टाइम कैप्सूल डाले जाने का फैसला हुआ है तब से ही लोगों में बहुत उत्सुकता है कि ये टाइम कैप्सूल क्या होता है? साल 1973 में पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने भी ऐसा ही एक टाइम कैप्सूल लाल किले के 32 फीट नीचे डलवाया था.

टाइम कैप्सूल दरअसल मेटल का एक कंटेनर जैसा होता है. उसमे जानकारी से भरे ऐतिहासिक दस्तावेज रख कर लॉक कर दिए जाते हैं और जमीन में काफी गहराई में गाड़ दिया जाता है. काफी गहराई में होने के बावजूद भी हजारों साल तक न तो उसको कोई नुकसान पहुंचता है और न ही वह सड़ता-गलता है. इसमें क्षमता होती है कि वो कागज़ को हज़ारों सालों तक सुरक्षित रख सके. टाइम कैप्सूल का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि भविष्य में कोई आपदा आती है और सब कुछ नष्ट हो जाता है तब आने वाली पीढ़ी जब उस जगह की खुदाई करेगी तो उसे टाइम कैप्सूल में रखे दस्तावेजों से इस बात की जानकारी हो जायेगी कि उस जगह पर अतीत में क्या था? क्या हुआ था? किस वक़्त कौन सी घटना घटी थी.

पुराने जमाने में टाइम कैप्सूल नहीं होते थे. इसलिए आज भी जब कहीं खुदाई होती है तो पुराने कलाकृति, पुराने अवशेष निकलते हैं तो उसके बारे में अध्ययन करना पड़ता है और अनुमान लगाना पड़ता है कि ये किस कालखंड का है. 2017 में स्पेन के बर्गोस में करीब 400 साल पुराना टाइम कैप्सूल मिला था. ये कैप्मूसूल दरअसल ईसा मसीह की मूर्ति के रूप में था. मूर्ति के अंदर एक दस्तावेज था जिसमें 1777 के आसपास की आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सूचना थी.

दुनिया भर में भले ही टाइम कैप्सूल को एक जरूरी दस्तावेज माना जाता हो लेकिन भारत में टाइम कैप्सूल को लेकर जमकर राजनीति होती रही है. 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने लालकिले के नीचे 32 फुट की गहराई में टाइम कैप्सूल डलवाया था. तब विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि इन्दिअर ने इस टाइम कैप्सूल में गांधी परिवार का महिमामंडन करने वाले दस्तावेज डलवाए हैं. 1977 में जब मोरारजी देसाई पीएम बने तो उन्होंने उस टाइम कैप्सूल को बाहर निकलवाया. लेकिन उसमे क्या लिख कर रखा गया था ये आज तक पता नहीं चल सका.

लाल किले के नीचे टाइम कैप्सूल डालती इंदिरा गाँधी

गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने भी  गांधीनगर में निर्मित महात्मा मंदिर के नीचे टाइम कैप्सूल डलवाया था जिसपर विपक्ष ने आरोप लगाये कि मोदी ने अपना महिमामंडन कर के टाइम कैप्सूल में डलवाया है. दुनिया भर के देश समय समय पर टाइम कैप्सूल जमीन के नीचे दफ़न करते रहते हैं. जिसमे एक कालखंड की प्रमुख घटनाओं का जिक्र होता है.

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