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चीन के इशारे पर काम कर रहा नेपाल? भारत के इन तीनों हिस्सों को नेपाल में अपने नक़्शे में दिखाया

बीते दिनों भारत ने पिथौरागढ़ से लगती चीन की सीमा पर सड़क निर्माण पूरा किया था. इस सड़क का निर्माण धारचूला से लेकर लिपुलेख तक किया गया है. ये मार्ग कैलाश मानसरोवर मार्ग के नाम से भी प्रसिद्द है. इस सड़क के निर्माण से कैलाश मानसरोवर यात्रा तो सुगम हो ही जायेगी साथ ही चीन सीमा पर स्थित सेना, आईटीबीपी और एसएसबी तक पहुँच भी आसन हो गई. लेकिन भारत के क्षेत्र में हुए इस निर्माण से नेपाल भड़क गया. नेपाल ने कहा कि भारत ने इस सड़क का निर्माण उसके इलाके में किया है. भारत ने नेपाल को जवाब भी दे दिया था. लेकिन लगता है कि नेपाल इन दिनों चीन के इशारे पर काम कर रहा है. नेपाल ने अपना एक नया नेपाल की सरकार ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी कर दिया है. इस नए नक्शे में भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को भी शामिल किया गया है. यानी कि नेपाल ने भारत के इन तीन इलाकों को अपना इलाका बताते हुए अपने नक़्शे में दिखाया है. नेपाल के इस कदम से अब भारत और नेपाल के बीच तनाव बढ़ गया है.

नक्शा जारी होने के बाद नेपाल की राष्‍ट्रपति बिद्या देवी भंडारी ने कहा, ‘लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी इलाके नेपाल में आते हैं और इन इलाकों को वापस पाने के लिए मजबूत कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे. नेपाल के सभी इलाकों को दिखाते हुए एक आधिकारिक मानचित्र जारी होगा.’

लिपुलेख सड़क का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते 8 मई को किया था. सड़क के उद्घाटन के बाद नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्‍यावली ने भारत के राजदूत विनय मोहन क्‍वात्रा को तलब कर सड़क पर आपत्ति जताई थी. भारत ने इसपर अपना जवाब देते हुए कहा था कि उत्‍तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में हाल ही बनी रोड पूरी तरह भारत के इलाके में हैं. लेकिन नेपाल पर इसका कोई असर नहीं हुआ. सोमवार को नेपाल के विदेश मंत्री ग्‍यावली ने एक ट्वीट में जानकारी दी कि ‘कैबिनेट ने 7 प्रान्‍त, 77 जिलों और 753 स्‍थानीय निकायों वाले नेपाल का नक्‍शा प्रकाशित करने का निर्णय लिया है. इसमें लिंपियाधुरा, लिपुलेक और कालापानी भी होंगे.’

भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद पहले भी होते रहे हैं लेकिन उसे बातचीत के जरिये हल कर लिया जाता था. लेकिन जिस तरह का कदम नेपाल ने अब उठाया है उससे आशंका जताई जा रही है कि वो चीन के कहे अनुसार काम कर रहा है. भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भी इस बात की आशंका जताई कि नेपाल के लिपुलेख मुद्दा उठाने के पीछे कोई विदेशी ताकत हो सकती है. हालाँकि उन्होंने सीधे सीधे चीन का नाम नहीं लिया. लेकिन ये स्पष्ट है कि चीन हमेशा से नेपाल को अपने प्रभाव में करने की कोशिश करता रहा है.

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