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औरंगाबाद रेल हा’दसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘अगर कोई रेल पटरी पर सो जाये तो…’

कोरोना वायरस की वजह से देश में लॉक डाउन है. जिसकी वजह से मजदूर अलग-अलग जगह फं’स गए हैं और लॉक डाउन के कारण उनके पास कोई भी कमाई का जरिया नहीं हैं. इसी वजह से मजदूरों ने मांग की उनको उनके गृह जनपद भेजा जाये. तो सरकार ने ट्रेन और बस का इंतजाम किया और मजदूरों को वापस उनके घर भेजा. लेकिन उसके बाद भी मजदूर पैदल ही अपने घर निकल लेते हैं. जिसकी वजह से उनको हा’दसे का भी शिकार होना पड़ता है.

पिछले कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एक रेल हा’दसा हुआ था. जिसमे मजदुरों की मौ’त हो गई थी. इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया गया था. उसके उपर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए ये कहा है कि ‘जब वो रेल की पटरियों पर सो जाएं, तो कोई इसे कैसे रोक सकता है?’

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि ‘राज्य सरकारें मजदूरों को उनके घर भेजने के लिये ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था कर रही हैं. लेकिन उसके बाद भी मजदूर क्यों पैदल निकल रहें हैं?’ ये बात समझ नहीं आ रही हैं? जब सरकार की तरफ से मजदूरों के लिए सारी व्यवस्था की जा रही है. उसके बाद भी मजदूर इंतजार नहीं कर रहे हैं और न ही सब्र करने को तैयार हैं. इस स्तिथि में सरकार क्या कर सकती हैं?

केंद्र से लेकर राज्य सरकारें मजदूरों से विनती कर रही है कि आप लोग पैदल न चले हम आपको आपके घर भेजेंगे लेकिन फिर भी मजदूर सुनने को तैयार नहीं हैं. अब सरकार अगर उनको बलपूर्वक रोकती है तो वो भी ठीक नहीं हैं. लेकिन मजदूरों को सरकार की बात माननी चाहिए और उनको सरकार द्वारा चलाई गई ट्रेन और बस से घर जाना चाहिए न की पैदल. पैदल चलने की वजह से ही औरंगाबाद वाला हा’दसा हुआ था. जिसमे मजदूर पैदल चलकर इतना थक के चूर हो गए थे कि उनको होश ही नहीं रहा ही कि कब मालगाड़ी आई और उनको मौ’त की नींद सुला कर चली गई.

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