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लॉकडाउन की हकीकत जानने के लिए रात में बाइक से निकल पड़े रामपुर डीएम, रास्ते में पुलिसकर्मी ने हड़काया

कोरोना के चलते पूरे देश में इस समय लॉकडाउन चल रहा है. इस महामारी से बचने का यही मात्र एक उपाय है कि लोग आसपास के लोगों के संपर्क में न आकर अपने घर में ही सुरक्षित रहें. हर प्रदेश की पुलिस भी अपने क्षेत्र के लोगों से लॉकडाउन का पालन करने की कह रही है लेकिन कहीं पुलिस पर हमला हो जाता तो कही कुछ.

जानकारी के लिए बता दें लॉकडाउन के दौरान एक एक किस्सा हम आपको रामपुर के डीएम का बताने जा रहे हैं जो आधीरात को अचानक से अपनी बाइक उठाकर शहर घूमने के लिए निकल गये और उन्होंने अपनी पहचान छिपा रखी थी. इसके पीछे की वजह ये थी कि शहर में लॉकडाउन की स्थिति को पता करने के लिए उन्होंने किसी और को भेजने के बजाय खुद को ही जाना सही समझा.

रामपुर के डीएम ने अपने कार्यालय के एक कर्मचारी की बाइक उठाई और निकल पड़े जिससे नाईट में पेट्रोलिंग कर रहे पुलिसवाले उन्हें पहचान न सकें और वो भी देख सकें कि पुलिस किस तरह काम कर रही है. कानून का उलंघन न हो इसके लिए उन्होंने हेलमेट भी पहना. इस दौरान उन्हें दो जगह ही चेकपोस्ट पर रोका गया. उन्होंने देखा कि लोग रात में कई जगह लॉकडाउन की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं. उन्होंने किसी से कुछ न कहते हुए बस सभी पॉइंट को याद रखा लेकिन इस दौरान ड्यूटी दे रहे एक सिपाही ने उन्हें न पहचानते हुए उनकी क्लास ली.

गौरतलब है कि सिपाही ने डीएम को लॉकडाउन की अहमियत बताई और ये भी बताया कि आधी रात को लॉकडाउन का उलंघन करने पर क़ानूनी कार्यवाही और सजा क्या हो सकती है? सिपाही के हड़काने के बाद भी डीएम साहब ने अपनी पहचान न जाहिर कर चुपचाप अपनी मोटरसाइकिल उठाई और चले गये. अगले दिन डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने उस सिपाही को बुलाया और उसे शाबासी दी और रात की पूरी घटना को बताया. इस मामले की पूरी जानकारी डीएम ने IANS न्यूज़ एजेंसी को बातचीत के दौरान बताई. उन्होंने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि ‘दरअसल जहां नाइट पेट्रोलिंग में वीक प्वाइंट्स मिले, उन प्वाइंट्स पर मौजूद कर्मचारियों या सेक्टर मजिस्ट्रेट्स को मैंने जानबूझकर उस वक्त नहीं पकड़ा. अगर किसी को टोकता तो मेरे रात में मोटर साइकिल से शहर में घूमने का मकसद ही खत्म हो जाता। हां, सुबह मैंने उन प्वांइट्स के स्टाफ को बुलाकर आगे से अलर्ट रहने की चेतावनी दी.’ वहीं उनसे जब सिपाही द्वारा हड़काया या पकड़ाया जाना नागवार नही गुजरा तो इसके जवाब में उन्होंने कहा ‘नहीं बिलकुल नहीं। असली और सच्चा तो सही मायने में सिपाही ही सरकारी मुलाजिम निकला। जिसने एलआईसी चौराहे पर मुझे रोक लिया। बाकायदा उसने मुझे लॉकडाउन की अहमियत समझाई। साथ ही लॉकडाउन का सख्ती से पालन करने को भी कहा।’

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