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अमेरिका के बाद इन देशों ने मांगी भारत से मदद, पीएम मोदी ने कह दी दिल छू लेने वाली बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देश को कोरो’ना से बचाने के लिए पुर जोर कोशिश में लगे हुए हैं. कोरो’ना जैसी बीमारी को लेकर आज बड़े बड़े देश भारत के सामने दवाई को लेकर हाँथ फैला रहें हैं. उसका कारण ये है कि भारत ने हाइड्रोक्सीकोलोरोक्विन का उत्पादन तो बढ़ा दिया है लेकिन इसको विदेश में भेजने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.  जिसका कारण ये है कि आज अमेरिका इजरायल जैसे देश भी भारत से इस दवाई की मांग कर रहे हैं.

दरअसल पीएम मोदी से जब अमेरिका, इजरायल, ब्राज़ील जैसे देशो ने मांग की तो मोदी ने उनको निराश नहीं किया और मोदी ने जोर देकर कहा कि ‘भारत हाइड्रोक्सीकोलोरोक्विन दवा के निर्यात पर प्रति’बंध लगाने की बजाए उन देशों की मदद करेगा जिन्हें इसकी जरुरत है.’ उन्होंने देशवासियों को यह सुनिश्चित किया कि भारत में इसकी मांग और स्टॉक में कोई कमी नहीं आने देंगे.

हालाँकि सूत्रों का कहना है कि एक बैठक में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा का उत्पादन बढ़ाने और अन्य देशों को सप्लाई भी करने का फैसला लिया गया, जिन्होंने इसकी आपूर्ति का अनुरोध किया है और उनके किये गए अनुरोध को आज मोदी पूरा भी कर रहे है.

दवाई की मांग को बढ़ता हुआ देख पीएम मोदी ने दवाई की वर्तमान की उत्पादन क्षमता को ध्यान में रखते हुए इस दवा को मरीजों, उनके करीबी संपर्कों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को दिया जाता है. सूत्र के अनुसार, ‘ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह इस मौके को भारत और दुनिया के लिए हाथ से निकलने नहीं देना चाहते हैं. यह एक महत्वपूर्ण पल है जब भारत लोगों की जिंदगियां बचा सकता है और हम इसे हाथ से जाने नहीं देंगे.

कोरो’ना के बचाव के लिए दवा बनाने वाली कंपनी जाइडस कैडिला के सीईओ पंकज पटेल ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी ने यह कहकर उद्योग को प्रेरित किया कि यह भारत के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने का एक अवसर है. उन्होंने हमें मदद का आश्वासन दिया और परिणाम सभी देख सकते हैं. इस महीने हमारे उद्योग ने 20 करोड़ टैबलेट्स का उत्पादन किया है. मेरी कंपनी अगले महीने 15 करोड़ एपीआई टैबलेट का उत्पादन करेगी.

आज के वक़्त में ये सब इसलिए संभव हो पाया है क्योकि प्रधानमंत्री खुद कोरो’ना से लड़ने के लिए कमान अपने हाथ में ले रखी है. जिसकी वजह से आज दवा बनाने के लिए भारत में कंपनी तैयार हैं और पर्याप्त मात्र में दवा बन भी रही हैं और बनती रहेंगी. विदेश में जाने के बाद भी भारत के पास इतनी दवा हैं की वो अपने देश में इसकी आपूर्ति कर सकता हैं. आज अपना देश भारत वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर मिला है.

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