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भारत से तनाव बढ़ा कर अपने ही घर में घिरे जिनपिंग, कुर्सी पर मंड’राया ख’तरा

चीन के रष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भले ही चीन की दा’दागि’री साबित करने के लिए भारत के साथ तनाव बढ़ाया हो लेकिन अब उनका ये दांव उन्ही पर भारी पड़ गया. जिनपिंग अब अपने ही देश और अपनी ही पार्टी में घिर गए हैं. अभी तक तो पार्टी में जिनपिंग के खिलाफ कोई नहीं बोलता था लेकिन अब जिनपिंग की नीतियों पर सवाल उठने लगे हैं. चीन में और सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी में अब सवाल उठने लगे हैं कि जिनपिंग ने भारत को ड’राने के लिए जो दांव चला था उसका उल्टा ही असर हुआ और पूरी दुनिया चीन के खिलाफ भारत के साथ आ गई.

चीन के रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चीन ने भारत की ताकत और उनकी विदेश नीति को कम करके आँका. चीन ने ऐसे मौके पर भारत को छेड़ा जब चीन खुद कोरोना की वजह से पूरी दुनिया में अलग थलग पड़ रहा था और भारत और अमेरिका करीब आ रहे थे. शी जिनपिंग अपनी रणनीति में बुरी तरह चूक गए. उनकी गलत रणनीति की वजह से भारत दुनिया का चहेता देश बन गया. हर कोई भारत के साथ व्यापार और गठबंधन बनाना चाहता है. भारत अमेरिका के दोस्तों के करीब भी आ गया. जापान, वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन ये सभी देश भारत के सामरिक और व्यापारिक सहयोगी बन गए.

चीन के पूरी दुनिया में अलग थलग होने के बाद कम्युनिस्ट पार्टी पर जिनपिंग का प्रभाव कम हुआ है.  2015-16 के स्लोडाउन में चीनी राष्ट्रपति की छवि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा था लेकिन यह समय उनपर भारी पड़ रहा है. चीन की कंपनियां हालातों का आंकलन कर वहां से निकलने में जुटी है. उन्हें लगता है कि अगर उनके प्रोडक्ट पर मेड इन चाइना लिखा रहा तो इससे उन्हें नुकसान होगा. भारत ने अपने प्रोजेक्ट्स से चीनी कंपनियों को बाहर निकालना शुरू कर दिया है. जो हुआवे कभी चीन की शान हुआ करता था उसके भविष्य पर अब ग्रहण लगा हुआ है. जिसकी वजह से चीन में बेरोजगारी बढ़ने लगी है.

अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया का एक अघोषित गठबंधन बन चुका है और ये सब जिनपिंग की गलत नीतियों की वजह से हुआ है. चीन ने एक साथ कई देशों को अपना दु’श्मन बना लिया है. चीनी नागरिकों को दुनिया भर में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और चीन में जिनपिंग के खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है. हर तरफ से घिर चुके जिनपिंग के लिए अपनी कुर्सी बचाना एक बड़ी चुनौती है.

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