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नेपाल : पीएम ओली के लिये अगले 24 घंटे मुश्किल, कुर्सी बचाने के लिए विपक्षी दलों पर डाल रहे डोरे

नेपाल की राजनीति दिन प्रतिदिन रोचक होती जा रही है. पीएम ओली की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही. पार्टी में उनके विरोधी प्रचंड उनका इस्तीफ़ा लेने पर अड़े हुए हैं. ओली और प्रचंड के बीच गतिरोध सुलझाने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक हुई लेकिन उनका कोई नतीजा नहीं निकला. प्रचंड हर हाल में ओली का इस्तीफ़ा चाहते हैं. पीएम ओली के पास कुर्सी बचाने का कोई रास्ता नहीं है. अगले 24 घंटे ओली के लिए बहुत ही अहम है.

नेपाल में जारी सियासी उठापटक के बीच आज ओली ने पूर्व प्रधानमंत्री नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा से मुलाक़ात कर सियासी सरगर्मी को और तेज कर दिया है. माना जा रहा है कि अपनी कुर्सी बचाने के लिए ओली ने देउबा से मदद मांगने के लिए उनसे मुलाकात की. अगर प्रचंड नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी को तोड़ते हैं तो ओली अपनी कुर्सी बचाने के लिए नेपाली कांग्रेस का समर्थन हासिल करने देउबा के पास गए थे. लेकिन इस मुलाक़ात के बाद देउबा अपनी पार्टी में ही घिर गए. नेपाली कांग्रेस के नेताओ ने देउबा से सवाल पूछा है कि बदले राजनितिक हालातों में ओली से मुलाक़ात के पीछे कयाक मंशा थी?

नेपाल के सदन में 275 सदस्य हैं. सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पास 174 सीटें हैं. जबकि मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के पास 63 सीटें हैं. जनता समाजबादी पार्टी के पास कुल 34 सीटें हैं. इनके अलावा 4 निर्दलीय हैं. 275 सदस्यीय सदन में 4 सदस्य निलंबित चल रहे हैं और एक सदस्य का निधन हो चुका है. इससे सदन की मौजूदा संख्या 270 है. बहुमत के लिए 136 सदस्यों का समर्थन चाहिए.

मौजूदा हालातों में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी में ज्यादातर सदस्य ओली के खिलाफ हैं. ऐसे में अगर प्रचंड पार्टी को तोड़ते हैं तो ओली के पास बहुमत का संकट हो जायेगा. अगर निर्दलीय प्रचंड के साथ आ गए और वो सरकार बनाने के करीब [पहुंचे तो ओली के कई और समर्थक सदस्य टूट सकते हैं और प्रचंड खेमे में जा सकते हैं. ऐसे में ओली के पास कुर्सी बचाने का एक ही रास्ता है कि वो नेपाली कांग्रेस के साथ गठबंधन कर ले. लेकिन जिस तरह से ओली और देउबा की मुलाक़ात के बाद नेपाली कांग्रेस में विरोध के स्वर उभरे ऐसे में इसकी संभावना बहुत कम है कि नेपाली कांग्रेस ओली को अपना समर्थन दे.

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