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ओली के भारत विरोधी कदम की आलोचना करने वाली नेपाली सांसद पर गिरी गाज, मिली ये सजा

नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने भारत विरोधी कदम उठाते हुए नेपाल का नया नक्शा पेश किया था तब पूरे नेपाल में सिर्फ एक आवाज ऐसी थी जो ओली के फैसले के खिलाफ थी. वो आवाज थी नेपाल की जनता समाजवादी पार्टी की संसद सरिता गिरी की. जब नेपाल के नक़्शे को संवैधानिक मंजूरी दिलाने के लिए उसे संसद में पेश किया गया तो सरिता गिरी ने उसका खुल कर विरोध किया था और अलग से प्रस्ताव दिया था कि पुराने नक्शे को ही मान्य रखा जाए. उनका मानना था कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल का हिस्सा हैं.

सरिता का ये प्रस्ताव खारिज हो गया था. उसके बाद सरिता गिरी के आवास पर हमले हुए थे और उन्हें नेपाल छोड़ने की ढंकी भी दी गई थी. संसद के अंदर सरिता गिरी को बोलने तक नहीं दिया गया था. उनकी पार्टी जनता समाजवादी पार्टी ने भी उनका साथ छोड़ दिया था और चेतावनी दी थी कि अगर वो अपनी बात से पीछे नहीं हटी तो उनपर कारवाई की जायेगी.

अब सरिता गिरी को भारत के समर्थन में आवाज उठाने की सजा दी गई है. उन्हें पार्टी से तो निकाल ही दिया गया. इसके अलावा उन्हें नेपाल की संसदीय समिति ने अयोग्य भी घोषित कर दिया है. सरिता गिरी मधेशी सांसद थी. नेपाल के तराई वाले इलाके को मधेश बहुल इलाका कहा जाता है. पार्टी से बाहर निकाले जाने पर जनता समाजवादी पार्टी ने सफाई देते हुए कहा है कि उन्होंने नए नक़्शे के प्रस्ताव पर पार्त्य्के व्हिप का उल्लंघन किया इस कारण उनपर अनुशासनात्मक कारवाई की गई है.

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