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जानिए नवरात्रि में 9 कन्याओं की पूजा क्यों की जाती है

कन्या पृथ्वी पर प्रकृति स्वरूप मां शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं. नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं की पूजा की जाती है. क्या आपको पता है क्यों की जाती है नवरात्रि में कन्या पूजन. नवरात्रि में कन्या पूजना का क्या धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. आइये जानते है क्यों की जाती है कन्या पूजा.

किस कन्या में होता है किस देवी का वास

शास्त्रों के अनुसार कन्या के जन्म का एक साल बीतने के बाद कन्या को कुवांरी की संज्ञा दी गई है। दो वर्ष की कन्या को कुमारी, तीन वर्ष की कन्या को त्रिदेव-त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कल्याणी, पांच वर्ष की कन्या को रोहिणी, छह वर्ष की कालिका, सात वर्ष की चंडिका, आठ वर्ष की शाम्भवी, नौ वर्ष की दुर्गा और दस वर्ष की कन्या सुभद्रा के समान मानी जाती है। शास्त्र के अनुसार तीन वर्ष से लेकर नौ वर्ष की कन्याएं माता का स्वरूप मानी जाती है। इसलिये नवरात्रि में 3 वर्ष से नौ वर्ष की कन्याओं की ही पूजा करें.

सबसे पहले करें कन्या का पूजन
दुर्गा सप्तशती में कहा गया है कि “कुमारीं पूजयित्या तू ध्यात्वा देवीं सुरेश्वरीम्” अर्थात दुर्गा पूजन से पहले कुवांरी कन्या का पूजन करने के बाद ही मां दुर्गा का पूजन करें। इससे माँ आप पर अपनी कृपा बरसाएंगी.

पुराण के अनुसार कन्या पूजन के मंत्र इस प्रकार हैं


मंत्राक्षरमयीं लक्ष्मीं मातृणां रूपधारिणीम्। नवदुर्गात्मिकां साक्षात् कन्यामावाहयाम्यहम्।।
जगत्पूज्ये जगद्वन्द्ये सर्वशक्तिस्वरुपिणि। पूजां गृहाण कौमारि जगन्मातर्नमोस्तु ते।।
।। कुमार्य्यै नम:, त्रिमूर्त्यै नम:, कल्याण्यै नमं:, रोहिण्यै नम:, कालिकायै नम:, चण्डिकायै नम:, शाम्भव्यै नम:, दुगायै नम:, सुभद्रायै नम:।।

पूजन विधि
कन्याओं का पूजन में पहले उनके पैर धुलें, इसके बाद विधि से पूजन करें और उन्हें भोजन कराएं और उसके बाद फल और दक्षिणा देकर विदा करें। इस तरह नवरात्रि के महापर्व पर कन्या का पूजन करके भक्त मां की कृपा पा सकते हैं।

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