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प्रवासी मजदूरों के बाद अब विदेश में फंसे हुए लोगों को स्वदेश लाने जा रही है सरकार लेकिन करना होगा ये काम

कोरोना ने इस समय पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लिया है और सभी देश इस बीमारी के आगे नतमस्तक हो गये हैं. चीन के वुहान शहर से फैला ये वायरस आज दुनियाभर के अधिकतर देशों में फ़ैल चुका है और बड़े बड़े शक्तिशाली देश इस वायरस के आगे झुक गये हैं क्योंकि अभी तक इस वायरस की कोई दवा नही बनी और न ही वैक्सीन बनी है.

जानकारी के लिए बता दें भारत में लगातार हर दिन बढ़ रहे मरीजों को देखते हुए मोदी सरकार ने पूरे देश में लॉकडाउन करने का फैसला लिया हालात फिर भी नही सुधरे तो लॉकडाउन को धीरे-धीरे आगे बढ़ाते गये क्योंकि सरकार के पास इसके अलावा अभी कोई और चारा भी नहीं था लेकिन सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती ये रही कि बाहर फंसे हुए मजदूरों को वापस उनके घर तक पहुंचाना.

दरअसल लॉकडाउन होने की वजह से पूरे देश में आवाजाही बंद हो गयी और बस, ट्रेन और हवाईसेवा बाधित हो गयी जिसके बाद जो व्यक्ति जहाँ था वहीं रह गया लेकिन अब सरकार बाहर फंसे हुए प्रवासी मजदूरों को निकालने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाकर उनके घर तक पहुँचाने का काम कर रही है. इसी बीच सरकार ने अब विदेशों में फंसे भारतीय लोगों को निकालने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है.

गौरतलब है कि अब मोदी सरकार विदेश में फंसे हुए लोगों को भी एक योजनाबद्ध तरीके से निकालने जा रही है. आगामी 7 मई से भारतीयों को विदेशों से स्वदेश वापस लाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी लेकिन सरकार ने इसके लिए स्पष्ट किया है कि विदेश से वापस लौटने वाले लोगों से हवाई किराया लिया जायेगा. साथ ही उनकी स्क्रीनिंग होगी और भारतीय आरोग्य सेतु ऐप पर रजिस्टर करना अनिवार्य होगा.

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