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आखिर कौन था वो मीर बाकी , जिसका नाम अयोध्या विवाद मामले में अक्सर आता रहता था?

जैसा की आप जानते हैं सर्वाधिक चर्चित व विवादित अयोध्या के रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में आज शनिवार के दिन सुबह साढ़े दस बजे सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सबके सामने रख दिया हैं। 40 दिनों से लगातार चल रही सुनवाई के बाद आज सुप्रेमे कोर्ट की अतभी से यह अनुमान लगाया जा रहा 5 जजओं की बेंच ने फैसला सुना दिया है और इस फैसले में यह विवादित ज़मीन राम मंदिर बनाने के लिए के दे दी गयी हैं और वही दूसरी ओर मुस्लिम लॉ बोर्ड को बाबरी मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ ज़मीन देने का आदेश दिया हैं । आयिए हम आपको यह बताते है की आखिर आज शनिवार 9 नवंबर का दिन फैसला सुनाने के लिए क्यों चुना गया। 400 साल पुरानी कहानी में सुनवाई के दौरान बार- बार एक नाम ज़रूर सुना होगा और वो नाम है’ मीर बाकी’। आयिए आज हम जानते हैं की आखिर यह मीर बाकी था कौन ?

मीर बाकी जिसे बाकी ताशकंदी के नाम से जाना जाता था, मुगल बादशाह बाबर का सेनापति था, जिसने बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। वही बाबरी मस्जिद, 6 दिसंबर 1992 को जिसके विध्वंस के बाद देश की धर्मनिरपेक्षता पर एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया था सवालिया निशान हमेशा के लिए लग गया। इस विध्वंस के बाद भारतीय हिंदू-मुस्लिम के बीच ये दरार बन गयी थी और जो आज तक थमने का नाम नहीं ले रही थी ।

1528-29 में बाबर के आदेश बनाया था मस्जिद
मस्जिद के शिलालेखों के मुताबिक 1528-29 में बाबर के आदेश पर मीर बाकी ने इस मस्जिद का निर्माण करवाया था। ये मस्जिद बहुत ही भव्य था, इसकी भव्यता का प्रमाण ये है कि ये मस्जिद अपने समय में उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी मस्जिद हुआ करती थी। इसको मस्जिद-ए-जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता था।

बाबरनामा में नहीं है बाबरी मस्जिद का जिक्र
ऐसा पता चला हैं की बाबरनामा में मीर बाकी के विषय में कुछ भी नहीं लिखा गया है। इतना ही नहीं बाबरनामा में बाबरी मस्जिद तक का जिक्र भी नहीं है। इस विवादित भूमि पर जो इतने वक़्त से जो घमासान चल रहा था उस में न होने के प्रमाण न तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस में हैं और न ही आईन-ए-अकबरी में हैं । ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के सर्वेयर फ्रांसिस बुकानन ने बाबरी मस्जिद से जोड़ते हुए मीर बाकी के नाम का जिक्र पहली बार 1813 में किया था।

2003 में मिले थे राम मंदिर होने के प्रमाण
ऐसा माना जाता है कि बाबरी मस्जिद के निर्माण से पहले वहां भगवान राम का भव्य मंदिर था। जिसे मीर बाकी ने तुड़वाकर बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। हालांकि, मुस्लिम पक्ष इस बात को पूरी तरह से खारिज करता रहा है कि वहां पहले कोई मंदिर था। इस विवादित भूमि पर मंदिर को होने की बात तब पता चली जब साल 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को मस्जिद के नीचे एक पुराना खंडर मिला जो हिंदू मंदिर से मिलता- जुलता जान पड़ता था।

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