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अपने राज्य के प्रवासी मजदूरों के लिए मसीहा बने सीएम योगी, जबकि नीतीश, गहलोत और ममता साबित हुए फिसड्डी

लॉकडाउन की वजह से सबसे ज्यादा मुसीबत प्रवासी मजदूरों पर आई. बिहार, यूपी, बंगाल और राजस्थान जैसे राज्यों के लाखों प्रवासी मजदूर दूसरे राज्यों पर फंस गए. पैदल अपने अपने गाँव और शहर की तरफ लौटते मजदूरों की तस्वीरों ने पूरे देश को हिला कर रख दिया. कई मजदूर घर पहुँचने से पहले ही काल के गाल में समा गए. लेकिन इन सब के बीच बिहार, राजस्थान और बंगाल की सरकारों ने अपने अपने मजदूरों को लेकर जिस तरह का रवैया दिखाया, उसने इन मजदूरों के दिल को तोड़ के रख दिया. एक तरफ तो बिहार, राजस्थान और बंगाल के मजदूर अपनी सरकारों की तरह आशा भरी नज़रों से देख रहे थे. लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी. दूसरी तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने राज्य के मजदूरों के लिए मसीहा बन कर उभरे. योगी ने न सिर्फ अपने राज्यों के मजदूरों का ख्याल रखा बल्कि यूपी से होकर गुजरते बिहार और बंगाल के मजदूरों के लिए भी हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की.

पिछले महीने से ही सीएम योगी ने एक एक्शन प्लान बना कर चरणबद्ध तरीके से दूसरे राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को वापस उत्तर प्रदेश लाने की कोशिशें आरम्भ कर दी. स्पेशल बसें चलवाई और रेलवे से अपने राज्य के लिए सबसे अधिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनें भी चलवाई. योगी के एक्शन प्लान और इस मुश्किल वक्त में काम करने के तरीकों ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की असफलता को भी उजागर कर दिया. ये तीनों ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीख सकते हैं कि कैसे इस मुश्किल वक़्त में अपने राज्य के लोगों के लिए काम किया जाता है.

योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ अपने राज्य के मजदूरों को वापस बुलाया बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश में ही रोजगार मिले इसकी भी व्यवस्था की. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस महामारी ने उन्हें एक अवसर दिया है इस दौरान हम अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ अन्य व्यवस्थाओं का बड़े स्तर पर आकलन करके उसमें सुधार कर सकते हैं.

मजदूरों के यूपी वापस लौटते ही योगी सरकार ने उन्हें रोजगार देने के लिए एक्शन प्लान पर काम करना शुरू कर दिया. सरकार के मुताबिक़ वो 50 लाख लोगों को यूपी में ही रोजगार देने की योजना पर काम कर रही है. न तो बिहार सरकार ने और न राजस्थान सरकार या फिर बंगाल सरकार ने इस तरह के किसी एक्शन प्लान को लागू करने का ऐलान किया. रेलवे ने तो यहाँ तक आरोप लगाये कि ममता बनर्जी प्रवासी मजदूरों को बंगाल बुलाना ही नहीं चाहती. बार बार उनसे ट्रेनों की संख्या पूछी गई तो कोई सही जवाब नहीं आया.

सीएम योगी ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि कोई भी मजदूर सड़क पर पैदल चलता न दिखे. ऐसे मजदूरों के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए और उन्हें रोककर उनके भोजन इत्यादि की व्यवस्था की जाए. इस मजदूरों के वापसी के क्रम में कई दु’र्घट’नाएं हुई और कई मजदूरों ने जा’न गंवाए. दुसरे राज्यों के मजदूर होने के बावजूद योगी सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया. मुजफ्फरनगर हा’दसा हो या औैरैया हा’दसा, सीएम योगी ने तुरंत मुआवजे का ऐलान किया. जबकि इन मजदूरों को उनके गृह राज्यों ने भगवान भरोसे छोड़ दिया.

मजदूरों से पहले कोटा में फंसे छात्रों को वापस बुलाने के लिए सीएम योगी ने जिस तरह से काम किया उसने कुछ अन्य राज्यों को भी प्रेरित किया अपने अपने छात्रों को वापस बुलाने के लिए . जबकि बिहार सरकार ने अपने छात्रों को लाने से साफ़ मना कर दिया.

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