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राजस्थान में आधी रात को चला सियासी ड्रामा, आज जेपी नड्डा और अमित शाह से मिल सकते हैं पायलट

राजस्थान में कल मध्य रात्री सियासी ड्रामा चला. अपना किला बचाने के लिए पार्टी ने दिल्ली से तीन नेताओं को राजस्थान रवाना किया और देर रात तक विधायकों को साधने की रणनीति बनती रही. रात के 2 बजे पार्टी ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया और दावा किया कि गहलोत के पक्ष में 109 विधायकों का समर्थन है. गहलोत सरकार के लिए आज का दिन काफी अहम और मुश्किल भरा है. अशोक गहलोत ने पार्टी के सभी विधायकों की सुबह 10 बजे मीटिंग बुलाई है और व्हिप जारी किया है. मीटिंग में शामिल नहीं होने वाले विधायकों पर कारवाई होगी. हालाँकि सचिन पायलट ने साफ़ कह दिया है कि वो मीटिंग में नहीं जायेंगे. इसके अलावा उनके समर्थक विधायक जो मानेसर के रिसॉर्ट में रुके हैं, वो भी मीटिंग में शामिल होने के लिए नहीं निकले हैं. मानेसर से जयपुर पहुँचने में कम से कम 5 घंटे का समय लगता है. 10 बजे विधायकों की मीटिंग बुलाई गई है. अब ये साफ है कि पायलट के साथ उनके समर्थक विधायक भी बैठक में शामिल नहीं होंगे.

उधर जयपुर में कांग्रेस रात भर गहलोत सरकार बचाने की रणनीति बनती रही इधर दिल्ली में सचिन पायलट उसकी धडकनें बढाते रहे. अपने दोस्त ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाक़ात के बाद सचिन पायलट ने ऐलान कर दिया कि गहलोत सरकार अल्पमत में है. साथ ही सचिन पायलट ने अपने तेवरों से ये भी जाहिर कर दिया कि जिस रास्ते पर वो निकल चुके हैं वहां से वापसी अब संभव नहीं. सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायक भाजपा के संपर्क में हैं. आज सचिन पायलट गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात कर सकते हैं. सचिन पायलट ने दावा किया है कि उनके साथ कांग्रेस के 30 विधायकों का समर्थन है और साथ ही कुछ निर्दलीय विधायक भी उनके साथ हैं. रविवार रात को कांग्रेस विधायकों की बुलाई गई मीटिंग में सिर्फ 75 विधायक ही पहुंचे.

सचिन पायलट को भाजपा में लाने की जिम्मेदारी पार्टी ने उनके दोस्त और हाल ही में कांग्रेस छोड़ कर भाजपा मे आये ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपी है. कल सिंधिया और पायलट के बीच करीब 40 मिनट तक मुलाक़ात हुई और इस मुलाक़ात के बाद ही उन्होंने साफ़ साफ ऐलान कर दिया कि गहलोत सरकार अल्पमत में है.

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