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WHO में भारत को मिला बड़ा पद, कोरोना फैलाने में चीन की भूमिका की होगी जांच?

कोरोना के पूरी दुनिया में तबाही मचाने के बाद चीन के साथ साथ WHO भी सवालों के घेरे में है. WHO पर जानकारी छुपाने और कोरोना के बारे में दुनिया को गुमराह करने में चीन का साथ देने का आरोप है. अमेरिका ने तो कड़ा कदम उठाते हुए WHO की फंडिंग भी रोक दी. कोरोना से पीड़ित कई देश वायरस फैलाने में चीन की भूमिका की जाँच की मांग कर रहे हैं लेकिन WHO आनाकानी करता रहा. लेकिन अब WHO में बड़ा बदलाव होने जा रहा है.

भारत अगले हफ्ते WHO के एग्जिक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन बनने जा रहा है. ऐसे में अमेरिका समेत कई देशों की नज़रें भारत पर टिक गई है. भारत इस पद पर जापान की जगह लेगा. साउथ-ईस्ट एशिया ग्रुप ने सर्वसम्मति से इस पद के लिए भारत के नाम का प्रस्ताव रखा था. भारत एग्जिक्यूटिव बोर्ड की अगली मीटिंग में यह पद संभालेगा. इस मीटिंग में डब्ल्यूएचओ के 194 सदस्य देश और पर्यवेक्षक हिस्सा लेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि भारत इस मीटिंग में कोरोना फैलाने में चीन की भूमिका की जांच की बात कह सकता है.

कोरोना की वजह से अमेरिका और चीन में तनाव चरम पर है. इसके अलावा हाल के दिनों में सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ा है. चीन ने बीते दिनों कई बार भारत को उकसाने वाली कारवाई की है. इसके बाद हाल ही में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं है और इसे लैबोरेटरी में तैयार किया गया था. हालाँकि उन्होंने चीन का नाम नहीं लिया लेकिन ये सब जानते हैं कि चीन के बुहान शहर से ही कोरोना वायरस फैला और वुहान में एक चीन का एक वायरस बैंक भी है जिसमे दुनिया भर के वायरस रखे गए हैं. ऐसे वक़्त में भारत के WHO के एग्जिक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन बनने के बाद चीन से खार खाए देशों की निगाहें अब भारत पर टिक गई है.

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