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नेपाल ने नक़्शे में भारत की जमीन को बताया अपना, भारत ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए कहा…

नेपाल ने बुधवार को अपना नया नक्शा जारी करते हुए भारत के 395 वर्ग किलोमीटर जमीन को अपना बताते हुए लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने नक़्शे में शामिल किया. नेपाल की भू प्रबंधन और सुधार मंत्री पद्मा अरयाल ने ये भी कहा कि अब से नेपाल के सरकारी कार्यालयों और स्कूलों में इसी नक़्शे का इस्तेमाल किया जाएगा. नेपाल की इस हरकत से भारत भड़क गया और कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की.

भारत के विदेश मंत्रालय की तरफ से बयान जारी कर कहा गया कि कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता में इस तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. विदेश मंत्रालय की तरफ से ये भी कहा गया कि विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि इस सीमा विवाद का हल बातचीत के माध्यम से निकालने के लिए आगे बढ़ना होगा.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि नेपाल द्वारा जारी किया गया नया नक्शा किसी ऐतिहासिक तथ्य पर आधारित नहीं बल्कि मनगढ़ंत है. इस तरह की हरकत भारत की तरफ से स्वीकार नहीं होगी. उन्होंने कहा, ‘नेपाल को भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए. नेपाल के नेतृत्व को ऐसा माहौल बनाना चाहिए जिससे बैठकर बात हो सके.’

नेपाल ने इस नक़्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा के अलावा गुंजी, नाभी और कुटी गांवों को भी शामिल किया गया है. जिस 395 वर्ग किलोमीटर भारत के इलाके पर नेपाल ने अपना दावा जताया है, उसमे कालापानी का 60 वर्ग किलोमीटर इलाका और लिंपियाधुरा का 335 किलोमीटर का क्षेत्र शामिल है. उसने ये सारा विवाद तब शुरू किया जब 8 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिपुलेख में एक सड़क का उद्घाटन किया. नेपाल ने कहना शुरू कर दिया कि ये सड़क निर्माण उसके क्षेत्र में हुआ है. जबकि भारत ने साफ़ कर दिया कि भारत ने ये निर्माण अपने इलाके में किया है.

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