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मंदिरों के सोने पर कांग्रेस की नज़र? इस वरिष्ठ कांग्रेस नेता के बयान से मच गया बवाल

कोरोना और लॉकडाउन से डांवाडोल अर्थव्यवस्था को सँभालने के लिए पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पॅकेज का ऐलान किया. इसके अलावा पीएम मेयर्स फण्ड से भी 3100 करोड़ रुपये जारी किये गए. लॉकडाउन के पहले चरण में भी 1.71 लाख करोड़ रुपये के रहत पॅकेज का ऐलान किया गया था. लेकिन लगता है कांग्रेस के नेता अब इन सब से संतुष्ट नहीं है. अब उनकी नज़र मंदिरों के सोने पर है. कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने एक ऐसा बयान दिया है जिसको लेकर सियासी बवाल खड़ा हो गया है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक बयान दिया कि संकट काल में जरूरत पड़ने पर सरकार को सभी धार्मिक ट्रस्टों से कम ब्याज पर सोना लेना चाहिए. पृथ्वीराज चौहान के इस बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस को लपेट लिया और सवाल उठाये कि क्या ये कांग्रेस का ऑफिशियल स्टैंड है? क्या पृथ्वीराज चौहान ने सोनिया गाँधी से पूछ कर ये बयान दिया है?

जब सियासी बवाल शुरू हुआ तो पृथ्वीराज चौहान ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ का पेश किया जा रहा है. उन्होंने सभी धार्मिक ट्रस्टों की बात की थी, लेकिन कुछ चैनल सिर्फ हिन्दू मंदिरों ई बात कर रहे हैं. अब पृथ्वीराज चौहान के बयान पर सवाल तो उठाना ही था. देश के बड़े मंदिरों ने स्वेच्छा से इस संकट कल में राहत कोष में डोनेशन दिया है. फिर उनके सोने पर नज़रें क्यों टेढ़ी की जा रही है. पृथ्वीराज चौहान ने भले ही ‘सभी धार्मिक ट्रस्ट’ कह कर बात को बैलेंस करने की कोशिश की हो ;लेकिन इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि सोना तो सिर्फ मंदिरों में ही चढ़ाया जाता है. सिर्फ हिन्दू श्रद्धालु ही मंदिरों में सोने का अर्पण करते हैं और दान देते हैं. ऐसे में पृथ्वीराज चौहान का इशारा किस तरफ था ये स्पष्ट तौर पर समझा जा सकता है.

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