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मजदूरों को लेकर चालू हुई सियासी उथल -पुथल के बीच बीजेपी ने किया बड़ा ऐलान

कोरोना की वजह से पिछले 40 दिन से लॉकडाउन में फं’से प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचाने के लिए इस बार लॉकडाउन में गृह मन्त्रालय ने छूट देने का ऐलान किया था. उसके बाद जो मजदूर फं’से थे. उनको ट्रेन से उनके गृह जनपद पहुँचाया जायेगा. लेकिन इन सबके बीच ट्रेन के टिकट को लेकर घमा’सान मच गया हैं. विपक्षी पार्टियाँ इस पर अपनी राजनितिक रोटियां सेंकना शुरू कर दिया हैं .

वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस हो या अन्य विपक्षी दल सब एक सुर में सवाल उठा रहे हैं कि जब मोदी सरकार विदेश में फं’से भारतीयों को सरकारी खर्चे पर वतन वापस ला सकती है तो गरीब मजदूरों से ट्रेन के टिकट के पैसे क्यों लिए जा रहे हैं?

विपक्ष द्वारा केंद्र सरकार पर जो ह’मला बोला जा रहा हैं उसको लेकर केंद्र सरकार ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी हैं. लेकिन उससे जुड़े सूत्र का कहना है कि ‘इस यात्रा का 85 फीसदी खर्च रेलवे उठा रहा है और बाकी खर्च के लिए संबंधित राज्य सरकारों से कहा गया है. इस बीच रेलवे का वो लेटर भी सामने आया है. जिसमें राज्य सरकारों से कहा गया है कि वो श्रमिक ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को टिकट देकर उनसे पैसा लें और ये पैसा रेलवे को दें.’

हालांकि, जो विपक्ष सरकार पर आ’रोप-प्रत्यारो’प लगा रही हैं. उसमे अभी तक ये साफ़ नहीं है कि जिन 15 फीसदी किराये की बात हो रही है वो सामान्य किराये की तुलना में कितना कम है. क्योंकि रेलवे ने जो खर्च जोड़ा है. उसमें ट्रेन के खर्च से लेकर सोशल डिस्टेंसिंग, खाने-पीने पानी की बोतल और सुपरफ़ास्ट और स्क्रीनिंग की व्यवस्था और ट्रेन मजदूरों को लेकर खाली लौटेगी उन सबका खर्च जोड़ कर बात हो रही हैं.

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